जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे उनके
हमें फिर भी नाज़ होता है हसीं इंकार पे उनके,
ख़बर उनको भी तो होगी कभी हालात की अपने
हमें तो फ़ुर्सत लुटानी है हर एक इतवार पे उनके,
भले रूठे रहे हमसे वो सालो साल तक लेकिन
नमी ये आँखों की न जाए कभी रुखसार पे उनके,
अगर करना है तो या ख़ुदा इतना ही करम करना
रहे फक़त हक़ हमारा ही सदा दीदार पे उनके,
छुपा कर हाल ए दिल हमसे वो कब तक जी लेंगे
एक दिन उतर आएँगे फ़रिश्ते भी इज़हार पे उनके..!!
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