दोस्तों ! आज दिल में छुपे कुछ राज़ बयाँ करता हूँ…

दोस्तों ! आज मैं दिल में छुपे कुछ राज़ बयाँ करता हूँ
दुःख से जुड़े ग़ुरबत के दिनों के लम्हात बयाँ करता हूँ,

वो दिन भी क्या दिन थे जब हम भूख से लड़ा करते थे
एक बार नहीं हर बार हर रोज़ पल पल मरा करते थे,

वो लम्हे जब माँ बड़े प्यार से सर को सहलाया करती थी
ख़ुद भूखी रह कर भी माँ हम सबको खिलाया करती थी,

बाबा भी जब आते तो दीवारों से लिपट कर रोया करते थे
मेहनत से कमाए हुए सिक्को को आँसूओ से धोया करते थे,

छोटी छोटी बातों में बड़ी बड़ी खुशियाँ ढूँढ लिया करते थे
हर दर्द ओ तकलीफ को हम मिल कर बाँट लिया करते थे,

खिलौनों से खेलने की उम्र में हम उम्मीदों से खेला करते थे
पर हर दिन नयी उमंग के संग बड़े सुकुन से जिया करते थे,

मुफ़्लिसी में भी कहाँ किसी से कम हमारे ठाठ हुआ करते थे
माँ के लिए हीरा मोती और बाबा के तो नवाब हुआ करते थे,

ये सब सुन कर ना सोच लेना कि बहुत ग़रीब हुआ करते थे
उन दिनों भी पानी में कागज़ के सही हमारे नाव चला करते थे..!!

~नवाब ए हिन्द


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