काजू भुने प्लेट में व्हिस्की गिलास में
उतरा है रामराज विधायक निवास में,
पक्के समाजवादी हैं तस्कर हों या डकैत
इतना असर है खादी के उजले लिबास में,
आज़ादी का ये जश्न मनाएँ वो किस तरह ?
जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में,
पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें
संसद बादल गई है यहाँ के नख़ाश में,
जनता के पास एक ही चारा है बग़ावत
ये बात कह रहा हूँ मैं होश ओ हवास में..!!
~अदम गोंडवी
वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग
Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


























1 thought on “काजू भुने प्लेट में व्हिस्की गिलास में”