चलो बाद ए बहारी जा रही है

चलो बाद ए बहारी जा रही है
पिया जी की सवारी जा रही है,

शुमाल ए जावेदान ए सब्ज़ ए जाँ से
तमन्ना की अमारी जा रही है,

फ़ुग़ाँ ऐ दुश्मन ए दार ए दिल ओ जाँ
मेरी हालत सुधारी जा रही है,

है पहलू में टके की एक हसीना
तेरी फ़ुर्क़त गुज़ारी जा रही है,

जो इन रोज़ों मेरा ग़म है वो ये है
कि ग़म से बुर्दबारी जा रही है,

है सीने में अजब एक हश्र बरपा
कि दिल से बेक़रारी जा रही है,

मैं पैहम हार कर ये सोचता हूँ
वो क्या शय है जो हारी जा रही है,

दिल उस के रू ब रू है और गुमसुम
कोई अर्ज़ी गुज़ारी जा रही है,

वो सय्यद बच्चा हो और शैख़ के साथ
मियाँ इज़्ज़त हमारी जा रही है,

है बरपा हर गली में शोर ए नग़्मा
मेरी फ़रियाद मारी जा रही है,

वो याद अब हो रही है दिल से रुख़्सत
मियाँ प्यारों की प्यारी जा रही है,

दरेग़ा तेरी नज़दीकी मियाँ जान
तेरी दूरी पे वारी जा रही है,

बहुत बदहाल हैं बस्ती तेरे लोग
तो फिर तू क्यूँ सँवारी जा रही है ?

तेरी मरहम निगाही ऐ मसीहा
ख़राश ए दिल पे वारी जा रही है,

ख़राबे में अजब था शोर बरपा
दिलों से इंतिज़ारी जा रही है..!!

~जौन एलिया

ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया

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1 thought on “चलो बाद ए बहारी जा रही है”

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