मुग़ालता है उरूज ओ ज़वाल थोड़ी है

mugaalta hai urooz o zawal

मुग़ालता है उरूज ओ ज़वाल थोड़ी है हमारी आँख के शीशे में बाल थोड़ी है, हमारे दिल में

दिल ए नादान की बात थी और कुछ नहीं

dil e nadaan ki baat thi

दिल ए नादान की बात थी और कुछ नहीं मुहब्बत स्याह रात थी और कुछ भी नहीं, आसानियों

वो दर्द वो वफ़ा वो मुहब्बत तमाम शुद

wo dard wo wafa

वो दर्द वो वफ़ा वो मुहब्बत तमाम शुद लिए दिल में तेरे क़ुर्ब की हसरत तमाम शुद, ये

रिहा कर मुझे या सज़ा दे ऐ आदिल

riha kar mujhe yaa saja de

रिहा कर मुझे या सज़ा दे ऐ आदिल कोई तो फ़ैसला तू सुना दे ऐ आदिल, यूँ असीरी

जब भी तुम चाहों मुझे ज़ख्म नया देते रहो

jab bhi tum chaaho mujhe

जब भी तुम चाहों मुझे ज़ख्म नया देते रहो बाद में फिर मुझे सहने की दुआ देते रहो,

सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई

sau baar chaman mahka sau

सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई दुनिया की वही रौनक़ दिल की वही तन्हाई, एक लहज़ा

हक़ मेहर कितना होगा बताया नहीं गया

haq mehar kitna hoga bataya nahi gaya

हक़ मेहर कितना होगा बताया नहीं गया शहज़ादियों को बाम पे लाया नहीं गया, कमज़ोर सी हदीस सुना

मुस्कुरा कर चलो खिलखिला कर चलो

muskura kar chalo khilkhila k

मुस्कुरा कर चलो खिलखिला कर चलो दिल किसी का मगर ना दुखा कर चलो, जिसकी ख़ुशबू जहाँ में

उसकी ख़ातिर रोना हँसना अच्छा लगता है

uski khaatir rona hansna

उसकी ख़ातिर रोना हँसना अच्छा लगता है जैसे धूप में बारिश होना अच्छा लगता है, ख़्वाब की कच्ची

दामन ए सद चाक को एक बार सी लेता हूँ मैं

daman e sad chaak ko ek baar

दामन ए सद चाक को एक बार सी लेता हूँ मैं तुम अगर कहते हो तो कुछ रोज़