वो कौन है जो मुझ पे तअस्सुफ़ नहीं करता

वो कौन है जो

वो कौन है जो मुझ पे तअस्सुफ़ नहीं करता पर मेरा जिगर देख कि मैं उफ़्फ़ नहीं करता,

मरज़ ए इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे

मरज़ ए इश्क़ जिसे

मरज़ ए इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे,

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे

अब तो घबरा के

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे मर के भी चैन न पाया तो किधर

कभी नज़रे मिला के कभी झुका के लूटा

कभी नज़रे मिला के

कभी नज़रे मिला के कभी झुका के लूटा कभी हँस के तो कभी मुस्कुरा के लूटा, मौज ए

धूप सरों पर और दामन में साया है

धूप सरों पर और

धूप सरों पर और दामन में साया है सुन तो सही जो पेड़ो ने फ़रमाया है, कैसे कह

बैर दुनिया से क़बीले से लड़ाई लेते

बैर दुनिया से क़बीले

बैर दुनिया से क़बीले से लड़ाई लेते एक सच के लिए किस किस से बुराई लेते, आबले अपने

ये बात फिर मुझे सूरज बताने आया है

ये बात फिर मुझे

ये बात फिर मुझे सूरज बताने आया है अज़ल से मेरे तआ’क़ुब में मेरा साया है, बुलंद होती

तेरा हाथ हाथ में हो अगर

तेरा हाथ हाथ में

तेरा हाथ, हाथ में हो अगर तो सफर ही असल ए हयात है, मेरे हर कदम पे हैं

जाने कब किस के छलकने से हो दुनिया ग़र्क़ ए आब

जाने कब किस के

जाने कब किस के छलकने से हो दुनिया ग़र्क़ ए आब मेरी मुट्ठी में है दरिया साग़र ओ

ठीक है कि ये जहाँ मुद्दत से उर्यानी पे था

ठीक है कि ये

ठीक है कि ये जहाँ मुद्दत से उर्यानी पे था पर किसे यूँ नाज़ कल तक चाक दामानी