नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है

नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है
किसे ख़बर कि बड़ी बेबसी का आलम है,

अजीब शय है ये नैरंगी ए ज़माना भी
किसी का कोई नहीं है किसी का आलम है,

मैं अब हक़ीक़त ए दुनिया समझ गया शायद
ख़ुद अपने आप से बेगानगी का आलम है,

हर एक देख रहा है मेरे तबस्सुम को
किसे ख़बर जो मेरी ज़िंदगी का आलम है,

मुझे अज़ीज़ है अब यूँ रईस नाकामी
सुना है ग़म से गुज़र कर ख़ुशी का आलम है..!!

~रईस रामपुरी

जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं

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