जो कहीं ना मिले वो ख़ुशी चाहिए
दर्द चाहे कैसा भी हो बंदगी चाहिए,
मुझे अब ख्वाहिश ए दुनिया नहीं
आख़िरत की मुझे ज़िन्दगी चाहिए,
फक़त तेरे ही आगे हाथ फैलाऊँ
या अल्लाह मुझे ऐसी बेबसी चाहिए,
मैं भटक जाऊँ तो आसरा दे मुझे
या अल्लाह मुझे तेरी रहबरी चाहिए,
गर मैं सज़दे में गिरू तो गिरा ही रहूँ
इबादत में बस ऐसी आज़िज़ी चाहिए..!!

























