जब भी उन के हमें अंदाज़ ए नज़र याद आए
दिल पे एक चोट लगी दर्द ए जिगर याद आए,
शब को याद आए कभी वक़्त ए सहर याद आए
हम भुलाते ही रहे आप मगर याद आए,
आह फिर होने लगी एक ख़लिश सी दिल में
उन के मुबहम से इशारात ए नज़र याद आए,
हाए क्या चीज़ मोहब्बत में है मजबूरी भी
लाख चाहा वो न याद आएँ मगर याद आए,
यूँ तो ये ज़ीस्त तुम्हारी है ख़ुशी से ले लो
अश्क रो के न रुकेंगे हम अगर याद आए,
अश्क छलके कभी होंटों पे मेरे आई हँसी
जब वो याद आए ब अंदाज़ ए दिगर याद आए,
हाए बस आने ही वाली थी हँसी होंटों पर
मुझ को गुज़रे हुए अय्याम मगर याद आए,
जब भी ऐ शौक़ ज़रा दिल को सुकूँ मिलने लगा
हम को उस शौक़ के अंदाज़ ए नज़र याद आए..!!
~विशनू कुमार शौक

























