तेरे ख़याल को ज़ंजीर करता रहता हूँ

tere khyal ko zanjeer karta rahta hoon

तेरे ख़याल को ज़ंजीर करता रहता हूँ मैं अपने ख़्वाब की ताबीर करता रहता हूँ, तमाम रंग अधूरे

क्यूँ आँखें बंद कर के रस्ते में चल रहा हूँ

kyun aankhen band kar ke

क्यूँ आँखें बंद कर के रस्ते में चल रहा हूँ क्या मैं भी रफ़्ता रफ़्ता पत्थर में ढल

इल्म ओ हुनर से क़ौम को रग़बत नहीं रही

ilm o hunar se qaum ko ragbat nahin rahi

इल्म ओ हुनर से क़ौम को रग़बत नहीं रही इस पर शिकायतें कि फ़ज़ीलत नहीं रही, बदलेगा क्या

अक़्ल की ऐसी ताबेदारी है

akl ki aisi taabedari hai

अक़्ल की ऐसी ताबेदारी है ख़्वाहिशों में भी इंकिसारी है, चल पड़ी है अजल की राहों पर ज़िंदगी

हैं मेरी परवाज़ के तेवर नए

hain meri parwaz ke tewar naye

हैं मेरी परवाज़ के तेवर नए साथ मेरे देखिए मंज़र नए, एक पुराने मयकदे में तिश्नगी ढूँढती है

मान ले अब भी मेरी जान ए अदा दर्द न चुन

maan le ab bhi meri jaan e adaa

मान ले अब भी मेरी जान ए अदा दर्द न चुन काम आती नहीं फिर कोई दुआ दर्द

डूबता साफ़ नज़र आया किनारा कोई दोस्त

doobta saaf nazar aaya kinara koi

डूबता साफ़ नज़र आया किनारा कोई दोस्त फिर भी कश्ती से नहीं हम ने उतारा कोई दोस्त, जब

तेरी जानिब अगर चले होते

teri zanib agar chale hote

तेरी जानिब अगर चले होते हम न यूँ दर ब दर हुए होते, सारी दुनिया है मेरी मुट्ठी

तेरी जुदाई ने ये क्या बना दिया है मुझे

Teri Judai ne ye

तेरी जुदाई ने ये क्या बना दिया है मुझे मैं भी जिस्म था साया बना दिया है मुझे,

जो दिख रहा है उसी के अंदर जो…

jo-dikh-raha-hai

जो दिख रहा है उसी के अंदर जो अनदिखा है वो शायरी है, जो कह सका था वो