शौक़ की हद को अभी पार किया जाना है
शौक़ की हद को अभी पार किया जाना है आइने में तेरा दीदार किया जाना है, हम तसव्वुर
Shayari
शौक़ की हद को अभी पार किया जाना है आइने में तेरा दीदार किया जाना है, हम तसव्वुर
लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है, आख़िर
दूर रह कर भी मेरे दिल के पास है तेरी यादों में हर पल का एहसास है, तेरी
रंग मौसम का हरा था पहले पेड़ ये कितना घना था पहले, मैं ने तो बाद में तोड़ा
जो कहीं था ही नहीं उस को कहीं ढूँढना था हम को एक वहम के जंगल में यक़ीं
हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है ये ज़िंदगी तो कोई इंतिक़ाम हो गई है,
दिन को दिन रात को मैं रात न लिखने पाऊँ उनकी कोशिश है कि हालात न लिखने पाऊँ,
यूँ देखिए तो आँधी में बस एक शजर गया लेकिन न जाने कितने परिंदों का घर गया, जैसे
सड़क पे दौड़ते महताब देख लेता हूँ मैं चलता फिरता हुआ ख़्वाब देख लेता हूँ, मेरी नज़र से
ज़रा सी धूप ज़रा सी नमी के आने से मैं जी उठा हूँ ज़रा ताज़गी के आने से,