दिन भर के दहकते हुए सूरज से लड़ा हूँ

din bhar ke dahkte hue sooraj se lada hoon

दिन भर के दहकते हुए सूरज से लड़ा हूँ अब रात के दरिया में पड़ा डूब रहा हूँ,

यूँ तो कम कम थी मोहब्बत उस की

yun to kam kam thi mohabbat us ki

यूँ तो कम कम थी मोहब्बत उस की कम न थी फिर भी रिफ़ाक़त उस की, सारे दुख

अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे

abhi to aur bhi din barishon ke aane the

अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे करिश्मे सारे उसे आज ही दिखाने थे, हिक़ारतें ही

गुलों के दरमियाँ अच्छी लगी हैं

gulon ke darmiyan achchi lagi hai

गुलों के दरमियाँ अच्छी लगी हैं हमें ये तितलियाँ अच्छी लगी हैं, गली में कोई घर अच्छा नहीं

हज़ारों लाखों दिल्ली में मकाँ हैं

hazaaron laakhon dilli me makaan hain

हज़ारों लाखों दिल्ली में मकाँ हैं मगर पहचानने वाले कहाँ हैं ? कहीं पर सिलसिला है कोठियों का

ऑफ़िस में भी घर को खुला पाता हूँ मैं

office me bhi ghar ko khula paata hoon

ऑफ़िस में भी घर को खुला पाता हूँ मैं टेबल पर सर रख कर सो जाता हूँ मैं,

इस शहर में कहीं पे हमारा मकाँ भी हो

is shahar me kahin pe humara makaan bhi ho

इस शहर में कहीं पे हमारा मकाँ भी हो बाज़ार है तो हम पे कभी मेहरबाँ भी हो,

कितना हसीन था तू कभी कुछ ख़याल कर

kitna hasin tha tu kabhi kuch khyal kar

कितना हसीन था तू कभी कुछ ख़याल कर अब और अपने आप को मत पाएमाल कर, मरने के

आँख में दहशत न थी हाथ में ख़ंजर न था

aankh me dahshat na thi haath me khanzar na tha

आँख में दहशत न थी हाथ में ख़ंजर न था सामने दुश्मन था पर दिल में कोई डर

मैं अपना नाम तेरे जिस्म पर लिखा देखूँ

main apna naam tere jism par likha dekhoon

मैं अपना नाम तेरे जिस्म पर लिखा देखूँ दिखाई देगा अभी बत्तियाँ बुझा देखूँ, फिर उस को पाऊँ