सारे भूले बिसरों की याद आती है

saare bhule bisro ki yaad aati hai

सारे भूले बिसरों की याद आती है एक ग़ज़ल सब ज़ख़्म हरे कर जाती है, पा लेने की

कितने अख़बार फ़रोशों को सहाफ़ी लिखा

kitne akhbaar faroshon ko sahafi likha

कितने अख़बार फ़रोशों को सहाफ़ी लिखा ना मुकम्मल को भी ख़ादिम ने इज़ाफ़ी लिखा, तू ने भूले से

पेट की आग बुझाने का सबब कर रहे हैं

pet ki aag bujhaane ka sabab kar rahe hai

पेट की आग बुझाने का सबब कर रहे हैं इस ज़माने के कई मीर मतब कर रहे हैं,

झूठ सच्चाई का हिस्सा हो गया

jhooth sachchai ka hissa ho gaya

झूठ सच्चाई का हिस्सा हो गया एक तरह से ये भी अच्छा हो गया, उस ने एक जादू

दिलों के माबैन शक की दीवार हो रही है

dilon ke maabain shaq kee deewar ho rahi hai

दिलों के माबैन शक की दीवार हो रही है तो क्या जुदाई की राह हमवार हो रही है

फ़राज़ ए इश्क़ तेरी इंतिहा नहीं हुए हम

faraz e ishq teri intiha nahi hue hum

फ़राज़ ए इश्क़ तेरी इंतिहा नहीं हुए हम किसी पे क़र्ज़ थे लेकिन अदा नहीं हुए हम, तेरी

रिश्तों की दलदल से कैसे निकलेंगे

rishton ki daldal se kaise nikalenge

रिश्तों की दलदल से कैसे निकलेंगे हर साज़िश के पीछे अपने निकलेंगे, चाँद सितारे गोद में आ कर

थोड़ा सा माहौल बनाना होता है

thoda saa maahaul banana hota hai

थोड़ा सा माहौल बनाना होता है वर्ना किसी के साथ ज़माना होता है, सच्चा शेर सुनाने वाले ख़त्म

सफ़र से लौट जाना चाहता है

safar se laut jaana chahta hai

सफ़र से लौट जाना चाहता है परिंदा आशियाना चाहता है, कोई स्कूल की घंटी बजा दे ये बच्चा

अश्क पीने के लिए ख़ाक उड़ाने के लिए

ashk peene ke liye khaaq udaane ke liye

अश्क पीने के लिए ख़ाक उड़ाने के लिए अब मेरे पास ख़ज़ाना है लुटाने के लिए, ऐसी दफ़अ