हाए क्या हाल कर लिया दिल का

haaye kya haal kar liya dil ka

हाए क्या हाल कर लिया दिल का ज़ख़्म अब तक नहीं सिया दिल का, आ के सूरत दिखा

हरी भरी थी टहनी सुर्ख़ गुलाब की भी

hari bhari thi tahni surkh gulab ki bhi

हरी भरी थी टहनी सुर्ख़ गुलाब की भी अजब कहानी थी सूखे तालाब की भी, आँख में एक

जब आफ़्ताब न निकला तो रौशनी के लिए

jab aaftab na nikala to raushni ke liye

जब आफ़्ताब न निकला तो रौशनी के लिए जला के हम ने परिंदे फ़ज़ा में छोड़ दिए, तमाम

लगे थे ग़म तुझे किस उम्र में ज़माने के

lage the gam tujhe kis umr me zamane ke

लगे थे ग़म तुझे किस उम्र में ज़माने के वही तो दिन थे तेरे खेलने के खाने के,

दरिया कभी एक हाल में बहता न रहेगा

dariya kabhi ek haal me bahta na rahega

दरिया कभी एक हाल में बहता न रहेगा रह जाऊँगा मैं और कोई मुझ सा न रहेगा, आसेब

मेरी ख़ातिर देर न करना और सफ़र करते जाना

meri khatir der na karna aur safar karte jaana

मेरी ख़ातिर देर न करना और सफ़र करते जाना लेकिन छोड़ के जाने वालो एक नज़र करते जाना,

जज़्बा ए शौक़ को इस तौर उभारा जाए

jazba e shauk ko is taur ubhaara jaaye

जज़्बा ए शौक़ को इस तौर उभारा जाए हम जिधर जाएँ उधर उन का नज़ारा जाए, आपसी रिश्तों

मैं ने कब अपनी वफ़ाओं का सिला माँगा था

main ne kab apni wafaaon ka sila maanga tha

मैं ने कब अपनी वफ़ाओं का सिला माँगा था एक तबस्सुम ही तेरा बहर ए ख़ुदा माँगा था,

ज़बाँ का पास है तो क़ौल सब निभाने हैं

zabaan ka paas hai to qaul sab nibhaane hain

ज़बाँ का पास है तो क़ौल सब निभाने हैं अगर मुकरने पे आऊँ तो सौ बहाने हैं, तीर

रंग हवा से छूट रहा है मौसम ए कैफ़ ओ मस्ती है

rang hawa se choot raha hai mausam e qaif o masti hai

रंग हवा से छूट रहा है मौसम ए कैफ़ ओ मस्ती है फिर भी यहाँ से हद्द ए