ख़ाकज़ादे ख़ाक में या ख़ाक पर हैं आज भी

khaaqzaade khaaq me yaa khaaq par hai aaj bhi

ख़ाकज़ादे ख़ाक में या ख़ाक पर हैं आज भी सामने एक कूज़ागर के चाक पर हैं आज भी,

ये कैसा काम ऐ दस्त ए मसीह कर डाला

ye kaisa kaam ae dast e maseeh kar daala

ये कैसा काम ऐ दस्त ए मसीह कर डाला जो दिल का ज़ख़्म था वो ही सहीह कर

राहतों के धोके में इज़्तिराब ढूँढे हैं

raahton ke dhoke me iztirab dhoondhe hain

राहतों के धोके में इज़्तिराब ढूँढे हैं हम ने अपनी ख़ातिर ही ख़ुद अज़ाब ढूँढे हैं, ये तो

क़यामत वक़्त से पहले गुज़र जाए तो अच्छा हो

qayamat waqt se pahle guzar jaaye to achcha ho

क़यामत वक़्त से पहले गुज़र जाए तो अच्छा हो नज़र कुछ देर जल्वों पर ठहर जाए तो अच्छा

जब भी उन के हमें अंदाज़ ए नज़र याद आए

jab bhi un ke hume andaz e nazar yaad aaye

जब भी उन के हमें अंदाज़ ए नज़र याद आए दिल पे एक चोट लगी दर्द ए जिगर

मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दा दार ए राज़ होती है

mohabbat khud hi apni parda daar e raaz hoti hai

मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दा दार ए राज़ होती है जो दिल पर चोट लगती है वो बे

आरज़ू ले के कोई घर से निकलते क्यूँ हो

aarzoo le ke koi ghar se nikalte kyun ho

आरज़ू ले के कोई घर से निकलते क्यूँ हो पाँव जुलते हैं तो फिर आग पे चलते क्यूँ

तुझ से बिछड़ के यूँ तो बहुत जी उदास है

tujh se bichhad ke yun to bahut jee udaas hai

तुझ से बिछड़ के यूँ तो बहुत जी उदास है लेकिन ये लग रहा है कि तू मेरे

दूर नज़रों से जो हो रहे हैं अभी एक दिन वो नज़ारे पलट आएँगे

door nazaron se jo ho rahe hai abhi ek din wo nazaare palat aayenge

दूर नज़रों से जो हो रहे हैं अभी एक दिन वो नज़ारे पलट आएँगे ग़म का सैलाब जिस

ग़म की अँधेरी रात की जाने सहर न आए क्यों

gam ki andheri raat ki jaane sahar na aaye kyo

ग़म की अँधेरी रात की जाने सहर न आए क्यों पहरों जले किसी का दिल ज़ख़्म उभर न