उजड़े हुए लोगों से गुरेज़ाँ न हुआ कर

ujde hue logo se gurezaan na hua kar

उजड़े हुए लोगों से गुरेज़ाँ न हुआ कर हालात की क़ब्रों के ये कतबे भी पढ़ा कर, क्या

दामन पे वो अश्कों की तहरीर नज़र आई

daaman pe ashko ki tahrir nazar aayi

दामन पे वो अश्कों की तहरीर नज़र आई हर ग़म में मोहब्बत की तस्वीर नज़र आई, ये फ़स्ल

क्यों न अपनी दास्ताँ बे रब्त अफ़्साना रहे

kyun na apni dastaan be rabt afsana rahe

क्यों न अपनी दास्ताँ बे रब्त अफ़्साना रहे तुम से हम मानूस हो कर ख़ुद से बेगाना रहे,

दिल में हर वक़्त ख़याल ए दर ए जानाना है

dil me har waqt khyal e dar e janaana hai

दिल में हर वक़्त ख़याल ए दर ए जानाना है यानी काबे के मुक़द्दर में सनम ख़ाना है,

कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा

kaun kahta hai ki maut aai to mar jaaoonga

कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा मैं तो दरिया हूँ समुंदर में उतर जाऊँगा, तेरा

जब तेरा हुक्म मिला, तर्क ए मुहब्बत कर दी

jab tera huqm mila tark e muhabbat kar dee

जब तेरा हुक्म मिला, तर्क ए मुहब्बत कर दी दिल मगर इस पे वो धड़का कि क़यामत कर

कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है

koi hindu koi muslim koi isaai hai

कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है, इतनी ख़ूँ

मायूस ए शाम ए ग़म तुझे इस की ख़बर भी है

maayus e sham e gam tujhe is ki khabar bhi hai

मायूस ए शाम ए ग़म तुझे इस की ख़बर भी है तारीकियों की आड़ में नूर ए सहर

अहल ए दुनिया वाक़िफ़ ए असरार ए पिन्हाँ हो गए

ahal e duniya waaqif e asrar e pinha ho gaye

अहल ए दुनिया वाक़िफ़ ए असरार ए पिन्हाँ हो गए दास्तान ए ग़म सुना कर हम पशेमाँ हो

किस को ख़ुशी के साथ ग़म ए दो जहाँ नहीं

kis ko khushi ke saath gam e do jahan nahi

किस को ख़ुशी के साथ ग़म ए दो जहाँ नहीं वो कौन सी बहार है जिस की ख़िज़ाँ