उस ने जब हँस के नमस्कार किया
उस ने जब हँस के नमस्कार किया मुझ को इंसान से अवतार किया, दश्त ए ग़ुर्बत में दिल
Shayari
उस ने जब हँस के नमस्कार किया मुझ को इंसान से अवतार किया, दश्त ए ग़ुर्बत में दिल
वो जो था वो कभी मिला ही नहीं सो गरेबाँ कभी सिला ही नहीं, उस से हर दम
दिल ने वफ़ा के नाम पर कार ए वफ़ा नहीं किया ख़ुद को हलाक कर लिया ख़ुद को
ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं, हो रहा हूँ मैं किस तरह
सर ही अब फोड़िए नदामत में नींद आने लगी है फ़ुर्क़त में, हैं दलीलें तेरे ख़िलाफ़ मगर सोचता
बड़े बने थे जालिब साहब पिटे सड़क के बीच गोली खाई लाठी खाई गिरे सड़क के बीच, कभी
जागने वालो ता ब सहर ख़ामोश रहो कल क्या होगा किस को ख़बर ख़ामोश रहो, किस ने सहर
कोई हालत नहीं ये हालत है ये तो आशोब नाक सूरत है, अंजुमन में ये मेरी ख़ामोशी बुर्दबारी
चलो बाद ए बहारी जा रही है पिया जी की सवारी जा रही है, शुमाल ए जावेदान ए
ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया मैं तो उस ज़ख़्म ही को भूल गया, ज़ात दर ज़ात