चुप है आग़ाज़ में, फिर शोर ए अजल पड़ता है

chup hai aagaz me fir shor e ajal padta hai

चुप है आग़ाज़ में, फिर शोर ए अजल पड़ता है और कहीं बीच में इम्कान का पल पड़ता

मोहब्बत में वफ़ादारी से बचिए

mohabbat me wafadari se bachiye

मोहब्बत में वफ़ादारी से बचिए जहाँ तक हो अदाकारी से बचिए, हर एक सूरत भली लगती है कुछ

मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं

mutthi bhar logo ke hathon me lakhon ki taqdeeren hain

मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं जुदा जुदा हैं धर्म इलाक़े एक सी लेकिन

रात के बाद नए दिन की सहर आएगी

raat ke baad naye din ki sahar ayegi

रात के बाद नए दिन की सहर आएगी दिन नहीं बदलेगा तारीख़ बदल जाएगी, हँसते हँसते कभी थक

कठ पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत

kath putli hai ya jivan hai jite jaao socho mat

कठ पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत सोच से ही सारी उलझन है जीते जाओ

न जाने कौन सा मंज़र नज़र में रहता है

na jaane kaun saa manzar nazar me rahta hai

न जाने कौन सा मंज़र नज़र में रहता है तमाम उम्र मुसाफ़िर सफ़र में रहता है, लड़ाई देखे

इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी

insan me haiwan yahan bhi hai wahan bhi

इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी अल्लाह निगहबान यहाँ भी है वहाँ भी, ख़ूँ ख़्वार दरिंदों

देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ

dekha hua saa kuch hai to socha hua saa kuch

देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ हर वक़्त मेरे साथ है उलझा हुआ सा

ज़मीन दी है तो थोड़ा सा आसमान भी दे

zameen dee hai to thoda saa aasmaan bhi de

ज़मीन दी है तो थोड़ा सा आसमान भी दे मेरे ख़ुदा मेरे होने का कुछ गुमान भी दे,

गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया

girja me mandiron me azaanon me bat gaya

गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया, इक इश्क़