आप की आँख से गहरा है मेरी रूह का ज़ख़्म

aapki aankh se gahra hai meri rooh ka zakhm

आप की आँख से गहरा है मेरी रूह का ज़ख़्म आप क्या सोच सकेंगे मेरी तन्हाई को ?

अब वो तूफ़ाँ है न वो शोर हवाओं जैसा

ab wo toofaan hai na wo shor hawaon jaisa

अब वो तूफ़ाँ है न वो शोर हवाओं जैसा दिल का आलम है तेरे बाद ख़लाओं जैसा, काश

एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया

ek pal me zindagi bhar ki udasi de gaya

एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया वो जुदा होते हुए कुछ फूल बासी दे गया,

दिल में बंदों के बहुत ख़ौफ़ ए ख़ुदा था पहले

dil me bando ke bahut khauf e khuda tha pahle

दिल में बंदों के बहुत ख़ौफ़ ए ख़ुदा था पहले ये ज़माना कभी इतना न बुरा था पहले,

जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रस्ता सुनसान हुआ

jab se us ne shahar ko chhoda har rasta sunsan hua

जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रस्ता सुनसान हुआ अपना क्या है सारे शहर का एक

इश्क़ गर हाथ छुड़ाए तो छुड़ाने देना

ishq gar haath chhudaye to chhudane dena

इश्क़ गर हाथ छुड़ाए तो छुड़ाने देना कार ए वहशत पे मगर आँच न आने देना, यूँ भी

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

sarfaroshi ki tamanna ab humare dil me hai

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ू ए क़ातिल में है, ऐ

मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते

mazlis e gam na koi bazm e tarab kya karte

मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते घर ही जा सकते थे आवारा ए शब,

वो चराग़ ए जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया

wo charag e jaan ki charag tha khin rahguzar me bujh gaya

वो चराग़ ए जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया मैं जो एक शो’लानज़ाद था हवस

मेरे सिवा भी कोई गिरफ़्तार मुझ में है

mere siwa bhi koi giraftar mujh me hai

मेरे सिवा भी कोई गिरफ़्तार मुझ में है या फिर मेरा वजूद ही बेज़ार मुझ में है, मेरी