उसे हम याद आते हैं फक़त फ़ुर्सत के लम्हों में

use hum yaad aate hain faqat fursat ke lamhon me

उसे हम याद आते हैं फक़त फ़ुर्सत के लम्हों में मगर ये बात भी सच है उसे फ़ुर्सत

चराग़ों से हवाएँ लड़ रही हैं

charagon se hawayen lad rahi hain

चराग़ों से हवाएँ लड़ रही हैं कि ख़ुद बच्चों से माएँ लड़ रही हैं, नशेमन तो उजाड़े थे

ता हद्द ए नज़र कोई भी दम साज़ नहीं है

taa hadd e nazar koi bhi dam saaz nahi hai

ता हद्द ए नज़र कोई भी दम साज़ नहीं है या फिर मेरी चीख़ों में ही आवाज़ नहीं

बच्चे की ज़िद को अब तो मेरा एतिबार दे

bachche kee zidd ko ab to mera etibar de

बच्चे की ज़िद को अब तो मेरा एतिबार दे ऐ आसमाँ ये चाँद मेरे घर उतार दे, चोरी

होश वालों को ख़बर क्या बे ख़ुदी क्या चीज़ है

hosh walon ko khabar kya be khudi kya cheej hai

होश वालों को ख़बर क्या बे ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है,

सदाक़त का जो पैग़म्बर रहा है

sadaqat ka jo paigambar raha hai

सदाक़त का जो पैग़म्बर रहा है वो अब सच बोलने से डर रहा है, कहानी हो रही है

मेज़ चेहरा किताब तन्हाई

maze chehra kitab tanhaai

मेज़ चेहरा किताब तन्हाई बन न जाए अज़ाब तन्हाई, कर रहे थे सवाल सन्नाटे दे रही थी जवाब

मुझ को सज़ा ए मौत का धोका दिया गया

mujh ko saza e maut ka dhoka diya gaya

मुझ को सज़ा ए मौत का धोका दिया गया मेरा वजूद मुझ में ही दफ़ना दिया गया, बोलो

दिल ग़म ए रोज़गार से निकला

dil gam e rozgaar se nikla

दिल ग़म ए रोज़गार से निकला किस घने ख़ारज़ार से निकला, हम-सफ़र हो गए मह ओ अंजुम मैं

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में

khushboo jaise log mile afsaane me

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में एक पुराना ख़त खोला अनजाने में, शाम के साए बालिश्तों से नापे