यूँ तो वो हर किसी से मिलती है
यूँ तो वो हर किसी से मिलती है हम से अपनी ख़ुशी से मिलती है, सेज महकी बदन
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यूँ तो वो हर किसी से मिलती है हम से अपनी ख़ुशी से मिलती है, सेज महकी बदन
ज़बान ए ग़ैर से क्या शरह ए आरज़ू करते वो ख़ुद अगर कहीं मिलता तो गुफ़्तुगू करते, वो
ग़म ए दौराँ ने भी सीखे ग़म ए जानाँ के चलन वही सोची हुई चालें वही बे साख़्तापन,
फ़नकार ख़ुद न थी मेरे फ़न की शरीक थी वो रूह के सफ़र में बदन की शरीक थी,
तेरी तलाश में हर रहनुमा से बातें कीं ख़ला से रब्त बढ़ाया हवा से बातें कीं, कभी सितारों
अब जी हुदूद ए सूद ओ ज़ियाँ से गुज़र गया अच्छा वही रहा जो जवानी में मर गया,
वो अहद अहद ही क्या है जिसे निभाओ भी हमारे वादा ए उलफ़त को भूल जाओ भी भला
क़िस्सा अभी हिजाब से आगे नहीं बढ़ा मैं आप, वो जनाब से आगे नहीं बढ़ा, मुद्दत हुई किताब
हम तुम्हारे ग़म से बाहर आ गए हिज्र से बचने के मंतर आ गए, मैं ने तुम को
जब किसी एक को रिहा किया जाए सब असीरों से मशवरा किया जाए, रह लिया जाए अपने होने