इस ख़ाकदाँ में अब तक बाक़ी हैं कुछ शरर से

is khaaqdaan me ab tak baaqi hai

इस ख़ाकदाँ में अब तक बाक़ी हैं कुछ शरर से दामन बचा के गुज़रो यादों की रहगुज़र से,

गूँजता है नाला ए महताब आधी रात को

goonjta hai naalaa e maahtab

गूँजता है नाला ए महताब आधी रात को टूट जाते हैं सुहाने ख़्वाब आधी रात को, भागते सायों

पर्दा ए शब की ओट में ज़ोहरा जमाल खो गए

parda e shab ki ot me zohra zamal

पर्दा ए शब की ओट में ज़ोहरा जमाल खो गए दिल का कँवल बुझा तो शहर तीरा ओ

दिल के वीराने में एक फूल खिला रहता है

dil ke veerane me ek phool khila

दिल के वीराने में एक फूल खिला रहता है कोई मौसम हो मेरा ज़ख़्म हरा रहता है, शब

मान ले अब भी मेरी जान ए अदा दर्द न चुन

maan le ab bhi meri jaan e adaa

मान ले अब भी मेरी जान ए अदा दर्द न चुन काम आती नहीं फिर कोई दुआ दर्द

डूबता साफ़ नज़र आया किनारा कोई दोस्त

doobta saaf nazar aaya kinara koi

डूबता साफ़ नज़र आया किनारा कोई दोस्त फिर भी कश्ती से नहीं हम ने उतारा कोई दोस्त, जब

तेरी जानिब अगर चले होते

teri zanib agar chale hote

तेरी जानिब अगर चले होते हम न यूँ दर ब दर हुए होते, सारी दुनिया है मेरी मुट्ठी

कितनी ज़ुल्फ़ें उड़ीं कितने आँचल उड़े चाँद को क्या ख़बर

kitni zulfen udi kitne aanchal ude

कितनी ज़ुल्फ़ें उड़ीं कितने आँचल उड़े चाँद को क्या ख़बर कितना मातम हुआ कितने आँसू बहे चाँद को

गली में दर्द के पुर्ज़े तलाश करती थी

gali me dard ke purje talash karti thi

गली में दर्द के पुर्ज़े तलाश करती थी मेरे ख़ुतूत के टुकड़े तलाश करती थी, कहाँ गई वो

हम ने जो दीप जलाए हैं तेरी गलियों में

hum ne jo deep jalayae hain

हम ने जो दीप जलाए हैं तेरी गलियों में अपने कुछ ख़्वाब सजाए हैं तेरी गलियों में, जाने