ग़म हर एक आँख को छलकाए ज़रूरी तो नहीं

gam har ek aankh ko chhalkaaye zaruri to nahin

ग़म हर एक आँख को छलकाए ज़रूरी तो नहीं अब्र उठे और बरस जाए ज़रूरी तो नहीं, बर्क़

झूठी ही तसल्ली हो कुछ दिल तो बहल जाए

jhuthi hi tasalli ho kuch dil to bahal jaaye

झूठी ही तसल्ली हो कुछ दिल तो बहल जाए धुंदली ही सही लेकिन एक शम्अ तो जल जाए,

ग़म ए हिज्राँ से ज़रा यूँ भी निभाई जाए

gam e hizraan se zara yun bhi nibhaai jaaye

ग़म ए हिज्राँ से ज़रा यूँ भी निभाई जाए महफ़िल ए ग़ैर सही आज सजाई जाए, इख़्तिलाफ़ात की

हर चंद जागते हैं पर सोए हुए से हैं

har chand jaagte hai par soye hue se hai

हर चंद जागते हैं पर सोए हुए से हैं सब अपने अपने ख़्वाबों में खोए हुए से हैं,

और कोई चारा न था और कोई सूरत न थी

aur koi chaara na tha aur koi surat na thi

और कोई चारा न था और कोई सूरत न थी उस के रहे हो के हम जिस से

हर एक झोंका नुकीला हो गया है

har ek jhoka nukila ho gaya

हर एक झोंका नुकीला हो गया है फ़ज़ा का रंग नीला हो गया है, अभी दो चार ही

दिन भर के दहकते हुए सूरज से लड़ा हूँ

din bhar ke dahkte hue sooraj se lada hoon

दिन भर के दहकते हुए सूरज से लड़ा हूँ अब रात के दरिया में पड़ा डूब रहा हूँ,

यूँ तो कम कम थी मोहब्बत उस की

yun to kam kam thi mohabbat us ki

यूँ तो कम कम थी मोहब्बत उस की कम न थी फिर भी रिफ़ाक़त उस की, सारे दुख

अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे

abhi to aur bhi din barishon ke aane the

अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे करिश्मे सारे उसे आज ही दिखाने थे, हिक़ारतें ही

गुलों के दरमियाँ अच्छी लगी हैं

gulon ke darmiyan achchi lagi hai

गुलों के दरमियाँ अच्छी लगी हैं हमें ये तितलियाँ अच्छी लगी हैं, गली में कोई घर अच्छा नहीं