ऐ मेरे हम नशीं चल कहीं और चल

ae-mere-ham-nashin

ऐ मेरे हम नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं, बात होती गुलों

भीगा हुआ है आँचल आँखों में भी नमी है

भीगा हुआ है आँचल

भीगा हुआ है आँचल आँखों में भी नमी है फैला हुआ है काजल आँखों में भी नमी है,

जिस वक़्त वालिदैन ने जनाज़े उठाये होंगे

jis waqt vaalidain ne janaje uthaye honge

जिस वक़्त वालिदैन ने जनाज़े उठाये होंगे उस वक़्त कितने खून के आँसू बहाए होंगे, मुंसफ सज़ा कहाँ

हक़ मेहर कितना होगा बताया नहीं गया

haq mehar kitna hoga bataya nahi gaya

हक़ मेहर कितना होगा बताया नहीं गया शहज़ादियों को बाम पे लाया नहीं गया, कमज़ोर सी हदीस सुना

दिल ए बेताब की मुझको हिमायत अब नहीं करनी

dil e betab ki mujhko

दिल ए बेताब की मुझको हिमायत अब नहीं करनी मुझे आज़ाद रहना हैं मुहब्बत अब नहीं करनी, गिला

कैसे होता है मुमकिन ये गवारा करना

kaise hota hai mumkin ye ganvara karna

कैसे होता है मुमकिन ये गवारा करना दिल में बसे हुए लोगो से किनारा करना, कुछ मुहब्बत के

दिल दे कर संगदिल को…

dil de kar sangdil ko

दिल दे कर संगदिल को ज़िन्दगी दुश्वार नहीं करना यूँ हर किसी से अपने इश्क़ का इजहार नहीं

एक बेवा की आस लगती है

ek beva ki aas lagti hai

एक बेवा की आस लगती है ज़िंदगी क्यों उदास लगती है, हर तरफ़ छाई घोर तारीकी रौशनी की

हक़ीक़तों में बदलता सराब चुभने लगा

haqiqaton me badalta sarab

हक़ीक़तों में बदलता सराब चुभने लगा जो बन सका न हक़ीक़त वो ख़्वाब चुभने लगा, सवाल सख़्त हमारा

यहाँ शोर बच्चे मचाते नहीं हैं…

yahan shor bachche machaate nahi

यहाँ शोर बच्चे मचाते नहीं हैं परिंदे भी अब गीत गाते नहीं हैं, वफ़ा के फ़लक पर मोहब्बत