झूठ का बोलना आसान नहीं होता है

झूठ का बोलना आसान

झूठ का बोलना आसान नहीं होता है दिल तेरे बाद परेशान नहीं होता है, सब तेरे बाद यही

उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा

उम्र भर सीने में

उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा एक बेनाम से रिश्ते को निभाए रखा, था मुझे वहम

मैं सोज़िश ए ग़म ए दौराँ से यूँ जला ख़ामोश

मैं सोज़िश ए ग़म

मैं सोज़िश ए ग़म ए दौराँ से यूँ जला ख़ामोश कि जैसे बज़्म में जलता हो एक दिया

फ़ासला जब मुझे एहसास ए थकन बख़्शेगा

फ़ासला जब मुझे एहसास

फ़ासला जब मुझे एहसास ए थकन बख़्शेगा पाँव को फूल भी काँटों की चुभन बख़्शेगा, कितने सूरज इसी

लोग बैठे हैं यहाँ हाथों में ख़ंजर ले कर

लोग बैठे हैं यहाँ

लोग बैठे हैं यहाँ हाथों में ख़ंजर ले कर तुम कहाँ आ गए ये शाख़ ए गुल ए

दीवाना हूँ मैं बिखरे मोती चुनता हूँ

दीवाना हूँ मैं बिखरे

दीवाना हूँ मैं बिखरे मोती चुनता हूँ लम्हा लम्हा जोड़ के सदियाँ बुनता हूँ, तन्हा कमरे सूना आँगन

अपने ही भाई को हमसाया बनाते क्यूँ हो

अपने ही भाई को

अपने ही भाई को हमसाया बनाते क्यूँ हो अपने सहन के बीच में दीवार लगाते क्यूँ हो ?

जब भी बैठता हूँ लिखने

जब भी बैठता हूँ

जब भी बैठता हूँ लिखने कुछ लिखा जाता नहीं, एक उसके सिवा कोई मौज़ूअ मुझे याद आता नहीं,

नई पोशाक पहने है पुराने ख़्वाब की हसरत

नई पोशाक पहने है

नई पोशाक पहने है पुराने ख़्वाब की हसरत मैं हँस कर टाल देती हूँ दिल ए बेताब की

वो काश मान लेता कभी हमसफ़र मुझे

वो काश मान लेता

वो काश मान लेता कभी हमसफ़र मुझे तो रास्तो के पेच का होता न डर मुझे, बेशक ये