न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है

न किसी पे ज़ख़्म

न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है न करम है हम पे

असर उस को ज़रा नहीं होता

असर उस को ज़रा

असर उस को ज़रा नहीं होता रंज राहत फ़ज़ा नहीं होता, बेवफ़ा कहने की शिकायत है तो भी

रह वफ़ा में कोई साहिब ए जुनूँ न मिला

रह वफ़ा में

, गुलों के रुख़ पे वही ताज़गी का आलम है न जाने उन को ग़म ए रोज़गार क्यूँ

और कोई दम की मेहमाँ है गुज़र जाएगी रात

और कोई दम की

और कोई दम की मेहमाँ है गुज़र जाएगी रात ढलते ढलते आप अपनी मौत मर जाएगी रात, ज़िंदगी

मुझ से बेहतर तो मिल गया है तुम्हें

मुझ से बेहतर तो

मुझ से बेहतर तो मिल गया है तुम्हें और अल्लह से क्या गिला है तुम्हें, हम इकट्ठे नहीं

किस को रौशन बना रहे हो तुम

kis ko raushan bana

किस को रौशन बना रहे हो तुम इतना जो बुझते जा रहे हो तुम लोग पागल बनाए जा

अभी तो ज़िंदा हैं कहते हो यारा क्या होगा

अभी तो ज़िंदा हैं

अभी तो ज़िंदा हैं कहते हो यारा क्या होगा हमारे बाद न जाने तुम्हारा क्या होगा हमारा ख़ुद

होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी

होती है तेरे नाम

होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी बरहम हुई है यूँ भी तबीअत कभी कभी, ऐ दिल

वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़रशनास नहीं

वो दिलनवाज़ है लेकिन

वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़रशनास नहीं मेरा इलाज मेरे चारागर के पास नहीं, तड़प रहे हैं ज़बाँ पर

कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें

कुछ यादगार ए शहर

कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें आए हैं उस की गली में तो पत्थर ही