कोई उम्मीद बर नहीं आती

Koi ummid bar nahin

कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती, मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँ

इशरत ए क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना

Ishrat e qatra hai

इशरत ए क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना,

न घर है कोई, न सामान कुछ रहा बाक़ी

naa-ghar-hai-koi

न घर है कोई, न सामान कुछ रहा बाक़ी नहीं है कोई भी दुनिया में सिलसिला बाक़ी, ये

पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं

Patthar ke khuda patthar

पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं तुम शहर ए मोहब्बत कहते हो

किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

kisi ranjish ko hawa

किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी मुझको एहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ

बख़्श दे कुछ तो एतिबार मुझे

Bakhsh de kuch to

बख़्श दे कुछ तो एतिबार मुझे प्यार से देख चश्म ए यार मुझे, रात भी चाँद भी समुंदर

मैं छू सकूँ तुझे मेरा ख़याल ए ख़ाम है क्या

main chhoo sakoon tujhe

मैं छू सकूँ तुझे मेरा ख़याल ए ख़ाम है क्या तेरा बदन कोई शमशीर ए बे नियाम है

तेरी जुदाई ने ये क्या बना दिया है मुझे

Teri Judai ne ye

तेरी जुदाई ने ये क्या बना दिया है मुझे मैं भी जिस्म था साया बना दिया है मुझे,

न वो मिलता है न मिलने का इशारा कोई

Na wo milta hai na

न वो मिलता है न मिलने का इशारा कोई कैसे उम्मीद का चमकेगा सितारा कोई ? हद से

लिबास तन से उतार देना, किसी को बांहों के हार देना

लिबास तन से उतार

लिबास तन से उतार देना, किसी को बांहों के हार देना फिर उसके जज़्बों को मार देना, अगर