रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह

rahte the kabhi jin

रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह बैठे हैं उन्ही के

मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते

masarraton ko ye ahal

मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते जो हर ख़ुशी में तेरे ग़म को भी समो

ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें

ye ruke ruke se

ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें यूँही कब तलक ख़ुदाया ग़म ए ज़िंदगी निबाहें,

किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे

kisi ne bhi to

किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे गया फिर आज का दिन भी उदास कर

आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख

aah e jaan soz

आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख हो ही जाएगी कोई जीने की तदबीर न

ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो

Ae Dil mujhe aisi

ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो अपना पराया मेहरबाँ ना मेहरबाँ कोई न

तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा तेरे सामने मेंरा हाल है

tujhe kya sunaaoon main

तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा तेरे सामने मेंरा हाल है तेरी एक निगाह की बात है मेंरी ज़िंदगी

बदन को काटता है दुख, मलाल नोचते हैं

badan ko kaatta hai

बदन को काटता है दुख, मलाल नोचते हैं ये दर्द भेड़िए हैं और खाल नोचते हैं, अज़ाब ए

कभी वो हाथ न आया हवाओं जैसा है

Kabhi wo haath na

कभी वो हाथ न आया हवाओं जैसा है वो एक शख़्स जो सचमुच ख़ुदाओं जैसा है, हमारी शम

ऐ दोस्त कहीं तुझ पे भी इल्ज़ाम न आए

Ae dost kahin tujh

ऐ दोस्त कहीं तुझ पे भी इल्ज़ाम न आए इस मेरी तबाही में तेरा नाम न आए, ये