अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे

apne chehre se jo

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे ? घर सजाने

क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता

kya dukh hai samundar

क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता,

मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने

mohabbat tark ki mai

मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने ज़माने अब तो ख़ुश हो ज़हर ये भी

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से

dekha hai zindagi ko

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से, ऐ रूह-ए-अस्र जाग

तुम अपना रंज-ओ-ग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो

tum apna ranj o

तुम अपना रंज-ओ-ग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो तुम्हें ग़म की क़सम इस दिल की वीरानी मुझे दे

तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम

tang aa chuke hai

तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम, मायूसी-ए-मआल-ए-मोहब्बत न

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया

main zindagi ka saath

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया, बर्बादियों का सोग

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया

kabhi khud pe kabhi

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया बात निकली तो हर एक बात पे रोना आया, हम

अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें

ab ahal e dard

अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें उसे भुला के ग़म ए ज़िंदगी का नाम करें,

मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है

mujh se kaha jibril

मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है मज़हब तो बस मज़हब ए