दोस्तों के सितम की बात करो

doston ke sitam ki

दोस्तों के सितम की बात करो बात ग़म की है ग़म की बात करो सच्ची बातों के हो

वक़्त जब साज़गार होता है

waqt jab saazgaar hota

वक़्त जब साज़गार होता है सच है दुश्मन भी यार होता है, बाँट ले ग़म जो ग़म के

दोनों आलम से वो बेगाना नज़र आता है

dono aalam se wo

दोनों आलम से वो बेगाना नज़र आता है जो तेरे इश्क़ में दीवाना नज़र आता है, इश्क़ ए

मुझे रंज होगा न मौत का अगर ऐसी मौत नसीब हो

mujhe ranj hoga na

मुझे रंज होगा न मौत का अगर ऐसी मौत नसीब हो मेरा दम जो निकले तो ऐ ख़ुदा

आग भी दिल में लगी है और अश्क ए ग़म भी है

aag bhi dil me

आग भी दिल में लगी है और अश्क ए ग़म भी है इश्क़ कहते हैं जिसे शोला भी

यार के सामने अग़्यार बुरे लगते हैं

yaar ke saamne agyaar

यार के सामने अग़्यार बुरे लगते हैं फूल होता है जहाँ ख़ार बुरे लगते हैं रात के फूल

आएगा कोई चल के ख़िज़ाँ से बहार में

aayega koi chal ke

आएगा कोई चल के ख़िज़ाँ से बहार में सदियाँ गुज़र गई हैं इसी इंतिज़ार में, छिड़ते ही साज़

नील गगन में तैर रहा है उजला उजला पूरा चाँद

neel gagan me tair

नील गगन में तैर रहा है उजला उजला पूरा चाँद माँ की लोरी सा बच्चे के दूध कटोरे

यूँ लग रहा है जैसे कोई आस पास है

yun lag raha hai

यूँ लग रहा है जैसे कोई आस पास है वो कौन है जो है भी नहीं और उदास

उस को खो देने का एहसास तो कम बाक़ी है

us ko kho dene

उस को खो देने का एहसास तो कम बाक़ी है जो हुआ वो न हुआ होता ये ग़म