हम तुम्हारे ग़म से बाहर आ गए

hum tumhare gam se bahar

हम तुम्हारे ग़म से बाहर आ गए हिज्र से बचने के मंतर आ गए, मैं ने तुम को

जब किसी एक को रिहा किया जाए

jab kisi ek ko riha kiya jaaye

जब किसी एक को रिहा किया जाए सब असीरों से मशवरा किया जाए, रह लिया जाए अपने होने

जाने वाले से राब्ता रह जाए

jaane waale se raabta rah jaaye

जाने वाले से राब्ता रह जाए घर की दीवार पर दिया रह जाए, एक नज़र जो भी देख

तारीकियों को आग लगे और दिया जले

tarikiyon ko aag lage aur

तारीकियों को आग लगे और दिया जले ये रात बैन करती रहे और दिया जले, उसकी ज़बाँ में

फिर रफ़ूगर ने भी ये कह के मुझे मोड़ दिया

fir rafoogar ne bhi ye kah ke

फिर रफ़ूगर ने भी ये कह के मुझे मोड़ दिया जा यहाँ पर तो कोई ज़ख़्म नहीं सिलते

किसी से ख़ुश है किसी से ख़फ़ा ख़फ़ा सा है

kisi se khush hai kisi se khafa

किसी से ख़ुश है किसी से ख़फ़ा ख़फ़ा सा है वो शहर में अभी शायद नया नया सा

जहाँ न तेरी महक हो उधर न जाऊँ मैं

jahan na teri mahak ho udhar na

जहाँ न तेरी महक हो उधर न जाऊँ मैं मेरी सरिश्त सफ़र है गुज़र न जाऊँ मैं, मेरे

राक्षस था न ख़ुदा था पहले

rakshas tha na khuda tha pahle

राक्षस था न ख़ुदा था पहले आदमी कितना बड़ा था पहले, आसमाँ खेत समुंदर सब लाल ख़ून काग़ज़

तेरा सच है तेरे अज़ाबों में

tera sach hai tere azaabon me

तेरा सच है तेरे अज़ाबों में झूठ लिखा है सब किताबों में, एक से मिल के सब से

कच्चे बख़िये की तरह रिश्ते उधड़ जाते हैं

kachche bakhiye ki tarah rishte

कच्चे बख़िये की तरह रिश्ते उधड़ जाते हैं लोग मिलते हैं मगर मिल के बिछड़ जाते हैं, यूँ