सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया

safar me ab ke azab tajraba nikal aaya

सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया भटक गया तो नया रास्ता निकल आया, मेरे ही नाम

दरवाज़े के अंदर एक दरवाज़ा और

darwaze ke andar ek darwaz aur

दरवाज़े के अंदर एक दरवाज़ा और छुपा हुआ है मुझ में जाने क्या क्या और ? कोई अंत

सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले

suna hai ye jahan achcha tha pahle

सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले ये जो अब दश्त है दरिया था पहले, जो होता कौन

शौक़ की हद को अभी पार किया जाना है

shauk kee had ko abhi paar kiya jaana hai

शौक़ की हद को अभी पार किया जाना है आइने में तेरा दीदार किया जाना है, हम तसव्वुर

लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है

likh likh ke aansuon se deewan kar liya

लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है, आख़िर

दूर रह कर भी मेरे दिल के पास है

door rah kar bhi mere dil ke paas hai

दूर रह कर भी मेरे दिल के पास है तेरी यादों में हर पल का एहसास है, तेरी

रंग मौसम का हरा था पहले

rang mausam ka hara tha pahle

रंग मौसम का हरा था पहले पेड़ ये कितना घना था पहले, मैं ने तो बाद में तोड़ा

जो कहीं था ही नहीं उस को कहीं ढूँढना था

jo kahin tha hi nahin us ko kahin dhoondhna tha

जो कहीं था ही नहीं उस को कहीं ढूँढना था हम को एक वहम के जंगल में यक़ीं

हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है

har ek saans hi hum par haram ho gayi hai

हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है ये ज़िंदगी तो कोई इंतिक़ाम हो गई है,

दिन को दिन रात को मैं रात न लिखने पाऊँ

din ko din raat ko main raat na likhne paaoon

दिन को दिन रात को मैं रात न लिखने पाऊँ उनकी कोशिश है कि हालात न लिखने पाऊँ,