जो पूछती हो तो सुनो ! कैसे बसर होती है

jo-puchti-ho-to

जो पूछती हो तो सुनो ! कैसे बसर होती है रात खैरात की, सदके की सहर होती है,

बड़े बड़े शहरों की अब यही पहचान है

bade-bade-shaharo-ki

बड़े बड़े शहरों की अब यही पहचान है ऊँची इमारतें और छोटे छोटे इन्सान है, अहल ए शहर

काली रात के सहराओं में नूर सिपारा लिखा था

kaali-raat-ke-sahraao

काली रात के सहराओं में नूर सिपारा लिखा था जिस ने शहर की दीवारों पर पहला ना’रा लिखा

उधर की शय इधर कर दी गई है

udhar-ki-shay-idhar

उधर की शय इधर कर दी गई है ज़मीं ज़ेर ओ ज़बर कर दी गई है, ये काली

सवालो के बदले लहज़े ऐसे…

sata le hamko jo dilchaspi hai unhe hamko satane me

सवालो के बदले लहज़े ऐसे कि हमें जानते ही न हो जैसे, मिजाज़ मौसम भी न बदले वो

ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी

ye-amiro-se-hamari

ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी फिर कहाँ से बीच में मस्ज़िद ओ मंदिर आ गए ?

कुछ बात है कि आज ख्याल ए यार आया

kuch-baat-hai-ki

कुछ बात है कि आज ख्याल ए यार आया एक बार नहीं बल्कि बार बार आया, भूल चुका

भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे

bhala-gamo-se-kahan

भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे हम आँसुओं की तरह मुस्कुराने वाले थे, हम ही ने

उदास एक मुझी को तो कर नही जाता

udas-ek-mujhi-ko

उदास एक मुझी को तो कर नही जाता वह मुझसे रुठ के अपने भी घर नही जाता, वह

भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ?

bharosa-kaise-kare-koi

भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ? न रहा सत्ता का यकीं हमको, न सत्ता