ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ

ye-kab-chaha-ki

ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ बस अपने आप को मंज़ूर हो जाऊँ, नसीहत कर रही

शख्सियत ए लख्त ए ज़िगर कहला न सका

shaksiyat-e-lakht-e

शख्सियत ए लख्त ए ज़िगर कहला न सका ज़न्नत के धनी क़दमों को मैं सहला न सका, दूध

ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है

gamo-ka-sailab-aya

ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है कुछ खोया तो कुछ पाया ज़रूर है, एक तुम हो जो दर्द

इस दिल में आह, आँखों में नाले है

is-dil-me-aah

इस दिल में आह, आँखों में नाले है हमें न सताओ हम तुम्हारे चाहने वाले है, मुहब्बत भरे

अगर तू साथ चल पड़ता सफ़र आसान हो जाता

agar-tu-saath-chal

अगर तू साथ चल पड़ता सफ़र आसान हो जाता ख़ुशी से उम्र भर जीने का एक सामान हो

हिज्र की शब घड़ी घड़ी दिल से यही…

हिज्र की शब घड़ी

हिज्र की शब घड़ी घड़ी दिल से यही सवाल है जिसके ख़याल में हूँ गुम उसको भी कुछ

ऐ लिखने वाले आख़िर तू ही क्यूँ लिखता है ?

ae-likhne-wale-aakhir

ऐ लिखने वाले आख़िर तू ही क्यूँ लिखता है ? है ये दर्द सबको फिर तुझे ही क्यूँ

अब अपने दीदा ओ दिल का भी ए’तिबार नहीं

ab-apne-deeda-o

अब अपने दीदा ओ दिल का भी ए’तिबार नहीं उसी को प्यार किया जिस के दिल में प्यार

आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया

aarzoo-ko-dil-hi

आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया और वो ये समझे कि मुझ को

इस बहते हुए लहू में मुझे तो

is bahte hue lahoo me

इस बहते हुए लहू में मुझे तो बस इन्सान नज़र आ रहा है लानत हो तुम पे तुम्हे