नीलोफ़र, शबनम नहीं, अँगार की बातें करो
नीलोफ़र, शबनम नहीं, अँगार की बातें करो वक़्त के बदले हुए मेयार की बातें करो, भाप बन सकती
Occassional Poetry
नीलोफ़र, शबनम नहीं, अँगार की बातें करो वक़्त के बदले हुए मेयार की बातें करो, भाप बन सकती
वामपंथी सोच का आयाम है नागार्जुन ज़िंदगी में आस्था का नाम है नागार्जुन, ग्रामगंधी सर्जना, उसमें जुलाहे का
इंद्रधनुषी रंग में महकी हुई तहरीर है अमृता की शायरी एक बोलती तस्वीर है, टूटते रिश्तों की तल्ख़ी
जिसके सम्मोहन में पागल, धरती है, आकाश भी है एक पहेली सी से दुनिया, गल्प भी है, इतिहास
दोस्तो! अब और क्या तौहीन होगी रीश की ब्रेसरी के हुक पे ठहरी चेतना रजनीश की, योग की
अचेतन मन में प्रज्ञा कल्पना की लौ जलाती है सहज अनुभूति के स्तर में कविता जन्म पाती है
ज़िंदगी दुश्वार है उफ़! ये गिरानी देखिए और फिर नेताओं की शोला बयानी देखिए, भीख का लेकर कटोरा
ये समझते हैं खिले हैं तो फिर बिखरना है पर अपने ख़ून से गुलशन में रंग भरना है,
ख़्वाब में कोई मुझ को आस दिलाने बैठा था जागा तो मैं ख़ुद अपने ही सिरहाने बैठा था,
यहाँ तकरार ए साअत के सिवा क्या रह गया है मुसलसल एक हालत के सिवा क्या रह गया