दुनियाँ ए अक़ीदत में अजब रस्म चली है

duniya e akidat me azab rasm

दुनियाँ ए अक़ीदत में अजब रस्म चली है जो दश्त में मजनूँ था वो मरकज़ मे वली है,

बे नियाज़ी के सिलसिले में हूँ

be niyazi ke silsile me

बे नियाज़ी के सिलसिले में हूँ मैं कहाँ अब तेरे नशे में हूँ, हिज्र तेरा मुझे सताता है

देख लेते हैं अब उस बाम को आते जाते

dekh lete hai ab us baam ko

देख लेते हैं अब उस बाम को आते जाते ये भी आज़ार चला जाएगा जाते जाते, दिल के

मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता

milne ki tarah wo mujh se

मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता दिल उस से मिला जिस से मुक़द्दर नहीं

वो हमसफ़र था मगर उससे हम नवाई न थी

wo humsafar tha magar usse hamnawai na

वो हमसफ़र था मगर उससे हम नवाई न थी कि धूप छांव का आलम रहा जुदाई न थी,

कितना नादान है वो मेरे दिल ए हाल से

kitna naadaan hai wo mere

कितना नादान है वो मेरे दिल ए हाल से ख़ुद का दिल दुखाता है ख़ुद के सवाल से,

तेरी आँखों ने आँखों का सिसकना भी नहीं देखा

teri aankhon ne aankhon ka

तेरी आँखों ने आँखों का सिसकना भी नहीं देखा मुहब्बत भी नहीं देखी, तड़पना भी नहीं देखा, नहीं

जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो

jina mushkil hai ki aasaan

जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो हर शख़्स लगता है परेशान ज़रा देख तो लो,

जवाँ हो ख़ुश अदा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ

javaan ho khush adaa ho

जवाँ हो ख़ुश अदा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ हसीं हो दिलरुबा हो इस लिए तारीफ़ करता

झगड़ना काहे का ? मेरे भाई पड़ी रहेगी

jhagadna kaahe ka mere bhai

झगड़ना काहे का ? मेरे भाई पड़ी रहेगी ये बाप दादा की सब कमाई पड़ी रहेगी, अंधेरे कमरों