आँसूं भी जो मिल जाएँ तो मुस्काती हैं
आँसूं भी जो मिल जाएँ तो मुस्काती हैं बेटियाँ तो बड़ी मासूम हैं जज़्बाती हैं, ख़िदमत से उतर
Occassional Poetry
आँसूं भी जो मिल जाएँ तो मुस्काती हैं बेटियाँ तो बड़ी मासूम हैं जज़्बाती हैं, ख़िदमत से उतर
उसने कहा कि मुझसे तुम्हें कितना प्यार है ? मैंने कहा सितारों का भी कोई शुमार है, उसने
मुझे यकीं है अब हमारा जहान बदलेगा ज़मीन बदलेगी और आसमान बदलेगा, ये खार बदलेंगे और खारज़ाद बदलेगा
वो मेरे घर नहीं आता मैं उसके घर नहीं जाता मगर इन एहतियातों से ताअल्लुक़ मर नहीं जाता,
जब लहजे बदल जाएँ तो वज़ाहतें कैसी ? नई मयस्सर हो जाएँ तो पुरानी चाहतें कैसी ? वस्ल
सोच के ख़ुद ही बताएं ये बताने वाले तूने सीखे हैं जो अंदाज़ ज़माने वाले, आधे रस्ते से
दिल ए बेताब की मुझको हिमायत अब नहीं करनी मुझे आज़ाद रहना हैं मुहब्बत अब नहीं करनी, गिला
कैसे होता है मुमकिन ये गवारा करना दिल में बसे हुए लोगो से किनारा करना, कुछ मुहब्बत के
मगरूर परिंदों को ये ऐलान गया है सय्याद नशेमन का पता जान गया है, यानि जिसे दीमक लगी
सबकी कहानी एक तरफ़ है मेरा क़िस्सा एक तरफ़ एक तरफ़ सैराब हैं सारे और मैं प्यासा एक