दूर ख्वाबों से मुहब्बत से किनारा कर के

door khwabon se muhabbat se kinara kar ke

दूर ख्वाबों से मुहब्बत से किनारा कर के जैसे गुजरेगी गुजारेंगे गुज़ारा कर के, अब तो दावा भी

लिखतें हैं दिल का हाल सुबह ओ शाम मुसलसल

likhta hoon dil ka haal subah o shaam

लिखतें हैं दिल का हाल सुबह ओ शाम मुसलसल तुम आते हो बहुत याद, सुबह ओ शाम मुसलसल,

ज़ाब्ते और ही मिस्दाक़ पे रखे हुए हैं

zaabte aur hi misdaq pe rakhe hue

ज़ाब्ते और ही मिस्दाक़ पे रखे हुए हैं आजकल सिदक़ ओ सफ़ा ताक़ पे रखे हुए हैं, वो

कितनी सदियाँ ना रसी की इंतिहा में खो गईं

kitni sadiyan naa rasi ki intiha me

कितनी सदियाँ ना रसी की इंतिहा में खो गईं बे जहत नस्लों की आवाज़ें ख़ला में खो गईं,

जो होगा सब ठीक होगा होने दो जो होना है

jo hoga sab thik hoga

जो होगा सब ठीक होगा होने दो जो होना है मुँह देखे की बातें है सब किस ने

फिर आईना ए आलम शायद कि निखर जाए

fir aaeen e aalam ki shayad

फिर आईना ए आलम शायद कि निखर जाए फिर अपनी नज़र शायद ताहद्द ए नज़र जाए, सहरा पे

दरख्तों से गिरे सूखे हुए पत्ते भी ये इक़रार करते हैं

darakhton se gire sukhe hue patte

दरख्तों से गिरे सूखे हुए पत्ते भी ये इक़रार करते हैं जिन्हें कल तक मुहब्बत थी वो अब

ज़ख़्मों को रफ़ू कर लें दिल शाद करें फिर से

zakhmon ko rafoo kar le

ज़ख़्मों को रफ़ू कर लें दिल शाद करें फिर से ख़्वाबों की कोई दुनिया आबाद करें फिर से,

सज सँवर कर रहा करो अच्छी लगती हो

saj sanvar ke raha karo achchi lagti ho

सज सँवर कर रहा करो अच्छी लगती हो झुमके, बालियाँ, पाज़ेब पहना करो अच्छी लगती हो, मुस्कुराते लब

ख़िज़ाँ रसीदा चमन में अक्सर

khijaan rasidaa chaman me aksar

ख़िज़ाँ रसीदा चमन में अक्सर खिला खिला सा गुलाब देखा, गज़ब का हुस्न ओ शबाब देखा ज़मीन पर