तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी
तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी ये तेरी तरह मुझ से तो शरमा न सकेगी, मैं बात
Occassional Poetry
तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी ये तेरी तरह मुझ से तो शरमा न सकेगी, मैं बात
काश ! एक तो ख्वाइश पूरी हो मेरी इबादत के बगैर वो मुझे अपने गले से लगाए मेरी
मेरी एक छोटी सी कोशिश तुझ को पाने के लिए बन गई है मसअला सारे ज़माने के लिए,
अकेले छोड़ जाते हो ये तुम अच्छा नहीं करते हमारा दिल दुखाते हो ये तुम अच्छा नहीं करते,
क़िस्से मेरी आशुफ़्ता नवाई के बहुत थे चर्चे तेरी अंगुश्त नुमाई के बहुत थे, दुनिया की तलब ही
दिल से मंज़ूर तेरी हम ने क़यादत नहीं की ये अलग बात अभी खुल के बग़ावत नहीं की,
नज़र नज़र से मिला कर कलाम कर आया ग़ुलाम शाह की नींदें हराम कर आया, कई चराग़ हवा
मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से दस्तार पे बात आ गई होती हुई सर
बहुत मुमकिन था हम दो जिस्म और एक जान हो जाते मगर दो जिस्म सिर्फ़ एक जान से
तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ अब के किसी बेनाम से मौसम की तरह आ,