अपने हाथों की लकीरों में सजा ले मुझ को

apne haathon ki lakiron

अपने हाथों की लकीरों में सजा ले मुझ को मैं हूँ तेरा तू नसीब अपना बना ले मुझ

उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या

umr guzregi imtihaan me

उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या दाग़ ही देंगे मुझ को दान में क्या मेरी हर बात बे असर

हर बज़्म में मौज़ू ए सुख़न दिल ज़दगाँ का

har bazm me mauzoo

हर बज़्म में मौज़ू ए सुख़न दिल ज़दगाँ का अब कौन है शीरीं है कि लैला है कि

सब हमारे लिए ज़ंजीर लिए फिरते हैं

sab humare liye zanjeer

सब हमारे लिए ज़ंजीर लिए फिरते हैं हम सर ए ज़ुल्फ़ ए गिरह गीर लिए फिरते हैं, कौन

जान हम तुझ पे दिया करते हैं

jaan hum tujh pe

जान हम तुझ पे दिया करते हैं नाम तेरा ही लिया करते हैं, चाक करने के लिए ऐ

जिस सम्त भी देखूँ नज़र आता है कि तुम हो

jis simt bhi dekhoon

जिस सम्त भी देखूँ नज़र आता है कि तुम हो ऐ जान ए जहाँ ये कोई तुम सा

रुख़्सत हुआ तो आँख मिला कर नहीं गया

rukhsat hua to aankh

रुख़्सत हुआ तो आँख मिला कर नहीं गया वो क्यूँ गया है ये भी बता कर नहीं गया,

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे

tumhare shahar ka mausam

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे, तुम्हारे बस

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

suna hai log use

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के

क़ैद शीशे में रहूँ अक्स बनूँ शाद रहूँ

qaid shishe me rahoon

क़ैद शीशे में रहूँ अक्स बनूँ शाद रहूँ या कि फिर फोड़ के ये आइना आज़ाद रहूँ यूँ