ये बात उन की तबीअत पे बार गुज़री है
ये बात उन की तबीअत पे बार गुज़री है कि ज़िंदगी मेरी क्यों ख़ुशगवार गुज़री है ? ख़ुशी
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ये बात उन की तबीअत पे बार गुज़री है कि ज़िंदगी मेरी क्यों ख़ुशगवार गुज़री है ? ख़ुशी
मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली हर एक चीज़ मिली एक ज़िंदगी न मिली, तेरी
ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है आग सीने में उसी ने तो लगाई हुई है, एक
तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ अब के किसी बेनाम से मौसम की तरह आ,
दिल से अगर कभी तेरा अरमान जाएगा घर को लगा के आग ये मेहमान जाएगा, सब होंगे उस
डूबने वाले की मय्यत पर लाखों रोने वाले हैं फूट फूट कर जो रोते हैं वही डुबोने वाले
ग़म हर एक आँख को छलकाए ज़रूरी तो नहीं अब्र उठे और बरस जाए ज़रूरी तो नहीं, बर्क़
झूठी ही तसल्ली हो कुछ दिल तो बहल जाए धुंदली ही सही लेकिन एक शम्अ तो जल जाए,
ग़म ए हिज्राँ से ज़रा यूँ भी निभाई जाए महफ़िल ए ग़ैर सही आज सजाई जाए, इख़्तिलाफ़ात की
फिरे राह से वो यहाँ आते आते अजल मर रही तू कहाँ आते आते ? न जाना कि