रहोगे हम से कब तक बेख़बर से

rahoge ham se kab tak bekhabar se

रहोगे हम से कब तक बेख़बर से जुदा होती नहीं दीवार दर से, मुसाफ़िर हाल क्या अपना सुनाए

तस्कीन न हो जिस में वो राज़ बदल डालो

taskeen na ho jis me wo raaz badal daalo

तस्कीन न हो जिस में वो राज़ बदल डालो जो राज़ न रख पाए हमराज़ बदल डालो, तुम

मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दादार ए राज़ होती है

mohabbat khud hi apni pardadar e raaz hoti hai

मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दादार ए राज़ होती है जो दिल पर चोट लगती है वो बे आवाज़

अमीरों के बुरे अतवार को जो ठीक समझे है

amiron ke bure avtar ko jo thik samjhe

अमीरों के बुरे अतवार को जो ठीक समझे है मेरी हक़ बात को वो क़ाबिल ए तश्कीक समझे

जुदा उस जिस्म से हो कर कहीं तहलील हो जाता

juda us jism se ho kar kahin tahlil ho jaata

जुदा उस जिस्म से हो कर कहीं तहलील हो जाता फ़ना होते ही लाफ़ानी में मैं तब्दील हो

इस तरह गुम हूँ ख़यालों में कुछ एहसास नहीं

is tarah gum hoon khyalon me kuch ehsas nahi

इस तरह गुम हूँ ख़यालों में कुछ एहसास नहीं कौन है पास मेरे कौन मेरे पास नहीं, दर्द

उजड़ उजड़ के सँवरती है तेरे हिज्र की शाम

ujad ujad ke sanvarti hai tere hizr kee shaam

उजड़ उजड़ के सँवरती है तेरे हिज्र की शाम न पूछ कैसे गुज़रती है तेरे हिज्र की शाम

निगाह ए इल्तिफ़ात अब बदगुमाँ मालूम होती है

nigaah e iltifaat ab badgumaan malum hoti hai

निगाह ए इल्तिफ़ात अब बदगुमाँ मालूम होती है मेरी हर बात दुनिया को गिराँ मालूम होती है, तड़प

हम तो हर ग़म को जहाँ के ग़म ए जानाँ समझे

hum to har gam ko jahan ke gam e jaanaan samjhe

हम तो हर ग़म को जहाँ के ग़म ए जानाँ समझे जब बढ़ा नश्शा तो हम बादा ए

भड़काएँ मेरी प्यास को अक्सर तेरी आँखें

bhadkaaye meri pyas ko aksar teri aankhen

भड़काएँ मेरी प्यास को अक्सर तेरी आँखें सहरा मेरा चेहरा है समुंदर तेरी आँखें, फिर कौन भला दाद