हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम

hujum dekh ke rasta nahi badalte hum

हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम किसी के डर से तक़ाज़ा नहीं बदलते हम, हज़ार ज़ेर ए

वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र है ख़तरे में

watan ko kuch nahi khatra nizam e zar hai khatre me

वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम ए ज़र है ख़तरे में हक़ीक़त में जो रहज़न है वही रहबर

अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं

apno ne wo ranj diye hai begaane yaad aate hain

अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं देख के उस बस्ती की हालत वीराने याद

दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं

dil ki baat labon par la kar ab tak hum dukh sahte hain

दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं हम ने सुना था इस

शेर से शायरी से डरते हैं

sher se shayari se darte hain

शेर से शायरी से डरते हैं कम नज़र रौशनी से डरते हैं, लोग डरते हैं दुश्मनी से तेरी

बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा

bewafa tum ko bhulaane me takalluf kaisa

बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा आइना सच का दिखाने में तकल्लुफ़ कैसा तीरगी घर की मिटाने

जल रहे हैं दिए मुंडेरों पर

jal rahe hai diye munderon par

जल रहे हैं दिए मुंडेरों पर हो रहा है करम अँधेरों पर तुम जो बन कर किरन किरन

जब से आई है दीपावली

jab se aai hai deepawali

जब से आई है दीपावली हर तरफ़ छाई है रौशनी हर जगह चाहतों के दिए शाम होते ही

दीवाली के दीप जलाएँ आ जाओ

deewali ke deep jalayen aa jaao

दीवाली के दीप जलाएँ आ जाओ रौशन रौशन गीत सुनाएँ आ जाओ गोशे गोशे में तज़ईन-ओ-ज़ेबाई साफ़ करें

रात कुछ तारीक भी है और कुछ रौशन भी है

raat kuch taarik bhi hai aur kuch raushan bhi

रात कुछ तारीक भी है और कुछ रौशन भी है वक़्त के माथे पे शोख़ी भी है भोला