अब तेरी ज़रूरत भी बहुत कम है मेरी जाँ

ab teri zarurat bhi bahut kam hai meri jaan

अब तेरी ज़रूरत भी बहुत कम है मेरी जाँ अब शौक़ का कुछ और ही आलम है मेरी

फिर कभी लौट कर न आएँगे

fir kabhi laut kar na ayenge

फिर कभी लौट कर न आएँगे हम तेरा शहर छोड़ जाएँगे, दूर उफ़्तादा बस्तियों में कहीं तेरी यादों

वो देखने मुझे आना तो चाहता होगा

wo dekhne mujhe aana to chahta hoga

वो देखने मुझे आना तो चाहता होगा मगर ज़माने की बातों से डर गया होगा, उसे था शौक़

उस रऊनत से वो जीते हैं कि मरना ही नहीं

us ranaut se wo jite hain ki marna hi nahin

उस रऊनत से वो जीते हैं कि मरना ही नहीं तख़्त पर बैठे हैं यूँ जैसे उतरना ही

ये और बात तेरी गली में न आएँ हम

ye aur baat teri gali me na aaye hum

ये और बात तेरी गली में न आएँ हम लेकिन ये क्या कि शहर तेरा छोड़ जाएँ हम,

झूठी ख़बरें गढ़ने वाले झूठे शेर सुनाने वाले

jhuthi khabren gadhne wale jhuthe sher sunane wale

झूठी ख़बरें गढ़ने वाले झूठे शेर सुनाने वाले लोगो सब्र कि अपने किए की जल्द सज़ा हैं पाने

ख़ूब आज़ादी ए सहाफ़त है

khoob aazadi e sahafat hai

ख़ूब आज़ादी ए सहाफ़त है नज़्म लिखने पे भी क़यामत है, दावा जम्हूरियत का है हर आन ये

कभी तो मेहरबाँ हो कर बुला लें

kabhi to meharbaan ho kar bula le

कभी तो मेहरबाँ हो कर बुला लें ये महवश हम फ़क़ीरों की दुआ लें, न जाने फिर ये

बटे रहोगे तो अपना यूँही बहेगा लहू

bate rahoge to apna yunhi bahega lahoo

बटे रहोगे तो अपना यूँही बहेगा लहू हुए न एक तो मंज़िल न बन सकेगा लहू, हो किस

मैं खुश नसीबी हूँ तेरी मुझे भी रास है तू

main khush nasibi hoon teri mujhe bhi raas hai tu

मैं खुश नसीबी हूँ तेरी मुझे भी रास है तू तेरा लिबास हूँ मैं और मेरा लिबास है