महताब सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक बसर हैं

maahtab sifat log yahan khaaq basar hain

महताब सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक बसर हैं हम महव ए तमाशा ए सर ए राह गुज़र हैं, हसरत

जब कोई कली सेहन ए गुलिस्ताँ में खिली है

jab koi kali sehan e gulistan me khili hai

जब कोई कली सेहन ए गुलिस्ताँ में खिली है शबनम मेरी आँखों में वहीं तैर गई है, जिस

दरख़्त सूख गए रुक गए नदी नाले

darakht sookh gaye rook gaye nadi naale

दरख़्त सूख गए रुक गए नदी नाले ये किस नगर को रवाना हुए हैं घर वाले ? कहानियाँ

दिल वालो क्यूँ दिल सी दौलत यूँ बे कार लुटाते हो

dil walon kyun dil see daulat yun be kar lutate ho

दिल वालो क्यूँ दिल सी दौलत यूँ बे कार लुटाते हो क्यूँ इस अँधियारी बस्ती में प्यार की

यूँ वो ज़ुल्मत से रहा दस्त ओ गरेबाँ यारो

yun wo zulmat se raha dast o gareban yaaro

यूँ वो ज़ुल्मत से रहा दस्त ओ गरेबाँ यारो उस से लर्ज़ां थे बहुत शब के निगहबाँ यारो,

हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले

hum aawara gaaon gaaon basti basti firne wale

हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले हम से प्रीत बढ़ा कर कोई मुफ़्त में क्यूँ ग़म

कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़

kam puraana bahut naya tha firaaq

कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़ एक अजब रम्ज़ आशना था फ़िराक़, दूर वो कब हुआ निगाहों से

बहुत रौशन है शाम ए ग़म हमारी

bahut raushan hai sham e gam humari

बहुत रौशन है शाम ए ग़म हमारी किसी की याद है हमदम हमारी, ग़लत है ला तअल्लुक़ हैं

मुझे शौक़ था तेरे साथ का

mujhe shauq tha tere sath ka

मुझे शौक़ था तेरे साथ का जो न मिल सका चलो खैर है मेरी ज़िन्दगी भी गुज़र गई

मीर ओ ग़ालिब बने यगाना बने

meer o galib bane yagaana bane

मीर ओ ग़ालिब बने यगाना बने आदमी ऐ ख़ुदा ख़ुदा न बने, मौत की दस्तरस में कब से