गुलशन की फ़ज़ा धुआँ धुआँ है

gulshan ki faza dhuaan dhuaan hai

गुलशन की फ़ज़ा धुआँ धुआँ है कहते हैं बहार का समाँ है, बिखरी हुई पत्तियाँ हैं गुल की

ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने

ye ujde baag veerane puraane

ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने सुनाते हैं कुछ अफ़्साने पुराने, एक आह ए सर्द बन कर रह गए

उस गली के लोगों को मुँह लगा के पछताए

us gali ke logo ko munh laga ke pachhtaye

उस गली के लोगों को मुँह लगा के पछताए एक दर्द की ख़ातिर कितने दर्द अपनाए, थक के

लोक गीतों का नगर याद आया

lok geeto ka nagar yaad aaya

लोक गीतों का नगर याद आया आज परदेस में घर याद आया, जब चले आए चमन ज़ार से

नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं

nazar nazar me liye tera pyar firte hain

नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं मिसाल ए मौज ए नसीम ए बहार फिरते हैं, तेरे

शहर वीराँ उदास हैं गलियाँ

shahar veeraan udaas hain galiyan

शहर वीराँ उदास हैं गलियाँ रहगुज़ारों से उठ रहा है धुआँ, आतिश ए ग़म में जल रहे हैं

तू रंग है ग़ुबार हैं तेरी गली के लोग

tu rang hai gubar hai teri gali ke log

तू रंग है ग़ुबार हैं तेरी गली के लोग तो फूल है शरार हैं तेरी गली के लोग,

हम ने दिल से तुझे सदा माना

hum ne dil se tujhe sada maana

हम ने दिल से तुझे सदा माना तू बड़ा था तुझे बड़ा माना, मीर ओ ग़ालिब के बाद

तेरे माथे पे जब तक बल रहा है

tere maathe pe jab tak bal raha hai

तेरे माथे पे जब तक बल रहा है उजाला आँख से ओझल रहा है, समाते क्या नज़र में

क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग बिरंगी कारों में

kya kya log guzar jaate hain rang birangi kaaro me

क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग बिरंगी कारों में दिल को थाम के रह जाते हैं दिल