ज़िंदगी दुश्वार है उफ़! ये गिरानी देखिए

zindagi dushwaar hai uff ye giraani dekhiye

ज़िंदगी दुश्वार है उफ़! ये गिरानी देखिए और फिर नेताओं की शोला बयानी देखिए, भीख का लेकर कटोरा

ये समझते हैं खिले हैं तो फिर बिखरना है

ye samjhte hain khile hain to fir bikhrna hai

ये समझते हैं खिले हैं तो फिर बिखरना है पर अपने ख़ून से गुलशन में रंग भरना है,

ख़्वाब में कोई मुझ को आस दिलाने बैठा था

khwab me koi mujh ko aas dilane baitha tha

ख़्वाब में कोई मुझ को आस दिलाने बैठा था जागा तो मैं ख़ुद अपने ही सिरहाने बैठा था,

यहाँ तकरार ए साअत के सिवा क्या रह गया है

yahan taqarar e saaat ke siwa kya rah gaya hai

यहाँ तकरार ए साअत के सिवा क्या रह गया है मुसलसल एक हालत के सिवा क्या रह गया

शिकस्त ए ख़्वाब का हमें मलाल क्यूँ नहीं रहा

shikast e khwab ka humen malal kyun nahi raha

शिकस्त ए ख़्वाब का हमें मलाल क्यूँ नहीं रहा बिछड़ गए तो फिर तिरा ख़याल क्यूँ नहीं रहा

बताता है मुझे आईना कैसी बे रुख़ी से

batata hai mujhe aaeena kaisi be rukhi se

बताता है मुझे आईना कैसी बे रुख़ी से कि मैं महरूम होता जा रहा हूँ रौशनी से, किसे

मेरे ख़्वाबों से ओझल उस का चेहरा हो गया है

mere khwabon se ojhal us ka chehra ho gaya hai

मेरे ख़्वाबों से ओझल उस का चेहरा हो गया है मैं ऐसा चाहता कब था पर ऐसा हो

कौन जात हो भाई ? दलित हैं साब !

kaun jaat ho bhai dalit hai saab

कौन जात हो भाई? “दलित हैं साब!” नहीं मतलब किसमें आते हो? आपकी गाली में आते हैं गंदी

अजब है रंग ए चमन जा ब जा उदासी है

azab hai rang e chaman jaa baa jaa udaasi hai

अजब है रंग ए चमन जा ब जा उदासी है महक उदासी है बाद ए सबा उदासी है,

एक ख़्वाब नींद का था सबब, जो नहीं रहा

ek khwab neend ka tha sabab jo nahi raha

एक ख़्वाब नींद का था सबब, जो नहीं रहा उस का क़लक़ है ऐसा कि मैं सो नहीं