हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा

har ghadi khud se uljhna hai muqaddar mera

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा, किस

ये कैसी कश्मकश है ज़िंदगी में

ye kaisi kashmaksh hai zindagi me

ये कैसी कश्मकश है ज़िंदगी में किसी को ढूँडते हैं हम किसी में, जो खो जाता है मिल

घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे

ghar se nikale to ho socha bhi kidhar jaaoge

घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे हर तरफ़ तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे, इतना आसाँ

कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया

koshish ke bavjood ye ilzam rah gaya

कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया हर काम में हमेशा कोई काम रह गया, छोटी थी उम्र

हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो

har ek ghar me diya bhi jale anaj bhi ho

हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो अगर न हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज भी

कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है

koi hindu koi muslim koi eesaai hai

कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है, इतनी ख़ूँ

काजू भुने प्लेट में व्हिस्की गिलास में

kaajoo bhune plate me whisky gilas me

काजू भुने प्लेट में व्हिस्की गिलास में उतरा है रामराज विधायक निवास में, पक्के समाजवादी हैं तस्कर हों

जितने हरामख़ोर थे क़ुर्बो जवार में

jitne haramkhor the kurbo jawar me

जितने हरामख़ोर थे क़ुर्बो जवार में परधान बनके आ गए अगली क़तार में, दीवार फाँदने में यूँ जिनका

पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो

pahle janab koi shigufa uchhal do

पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो फिर कर का बोझ क़ौम की गर्दन डल डाल दो, रिश्वत को

आदमी ही आदमी के बीच में आने लगा

aadmi hi aadmi ke beech me aane laga

आदमी ही आदमी के बीच में आने लगा फिर वही गुज़रा ज़माना ख़ुद को दुहराने लगा, एक अदना