ज़िंदगी ऐसे चल रही है दोस्त

zindagi aise chal rahi hai dost

ज़िंदगी ऐसे चल रही है दोस्त जैसे मय्यत निकल रही है दोस्त, आज जाना है ग़म की महफ़िल

आँख से कैसे कहूँ अब भी अंधेरा देखे

aankh se kaise kahoon ab bhi andhera dekhe

आँख से कैसे कहूँ अब भी अंधेरा देखे मुद्दतें बीत गईं धूप का जल्वा देखे, दो गिलासों में

तू तो तन्हा सर ए बाज़ार निकल जाता है

tu to tanha sar e bazar nikal jaata hai

तू तो तन्हा सर ए बाज़ार निकल जाता है देखते देखते माहौल बदल जाता है, तुम ने हर

तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले

tu mujhe yaad kare aisa tareeqa nikale

तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले मेरी यकतरफ़ा मोहब्बत का नतीजा निकले, तेरी आँखों में दिखाई दे

दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बाद

dil kisi ka na hua ek kharidar ke baad

दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बाद यहाँ लोग बाज़ार लगा लेते हैं बाज़ार के बाद,

रह रह के याद आती है उस शर्मसार की

rah rah ke yaad aati hai us sharmsar kee

रह रह के याद आती है उस शर्मसार की बे इख़्तियारी देख मेरे इख़्तियार की, डर है कि

शर्मिंदगी में उम्र बसर कर रहे हैं हम

sharmindagi me umr basar kar rahe hain hum

शर्मिंदगी में उम्र बसर कर रहे हैं हम ये काम था तुम्हारा मगर कर रहे हैं हम, पीना

अब कहाँ दोस्त मिलें साथ निभाने वाले

ab kahan dost mile saath nibhane wale

अब कहाँ दोस्त मिलें साथ निभाने वाले सब ने सीखे हैं अब आदाब ज़माने वाले, दिल जलाओ या

ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा

ye mohabbat ka fasana bhi badal jayega

ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा वक़्त के साथ ज़माना भी बदल जाएगा, आज कल में कोई

बज़्म ए तकल्लुफ़ात सजाने में रह गया

bazm e takallufaat sajaane me rah gaya

बज़्म ए तकल्लुफ़ात सजाने में रह गया मैं ज़िंदगी के नाज़ उठाने में रह गया, तासीर के लिए