नासिर क्या कहता फिरता है कुछ न सुनो तो बेहतर है

nasir kya kahta firta hai kuch na suno to behtar hai

नासिर क्या कहता फिरता है कुछ न सुनो तो बेहतर है दीवाना है दीवाने के मुँह न लगो

नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा

nateeja fir wahi hoga suna hai saal badlega

नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा परिंदे फिर वही होंगे शिकारी जाल बदलेगा, बदलना है तो

पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था

pichhle baras tum saath the mere aur december tha

पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था महके हुए दिन रात थे मेरे और दिसम्बर था,

नहीं काम रखना कोई दिल लगी से यकुम जनवरी से

nahi kaam rakhna koi dil lagi se yakum janwari se

नहीं काम रखना कोई दिल लगी से यकुम जनवरी से गुज़रना नहीं अब तुम्हारी गली से यकुम जनवरी

ऐ नए साल बता तुझ में नयापन क्या है

ae naye saal bata tujh me nayapan kya hai

ऐ नए साल बता तुझ में नयापन क्या है हर तरफ़ ख़ल्क़ ने क्यों शोर मचा रखा है

एक बरस और कट गया शारिक़

ek baras aur kat gaya shariq

एक बरस और कट गया शारिक़ रोज़ साँसों की जंग लड़ते हुए, सब को अपने ख़िलाफ़ करते हुए

मुबारक मुबारक नया साल सब को

mubarak mubarak naya saal sab ko

मुबारक मुबारक नया साल सब को न चाहा था हम ने तू हम से जुदा हो, मगर किस

गुफ़्तुगू जो होती है साल ए नौ से अम्बर की

guftagoo jo hoti hai saal e nau se ambar kee

गुफ़्तुगू जो होती है साल ए नौ से अम्बर की गर्म होने लगती हैं सर्दियाँ दिसम्बर की, जाने

सहर ने मसर्रत का नग़्मा सुनाया

sahar ne masarrat ka nagma sunaya

सहर ने मसर्रत का नग़्मा सुनाया फ़ज़ा ने गुलिस्ताँ का दामन सजाया, हवाओं ने अख़्लाक़ का गीत गाया

हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे

hum bichhad ke tum se baadal kee tarah

हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे थक गए तो ख़्वाब की दहलीज़ पर सोते